एकादशी - 22 अक्टूबर 2026, पारण समय 6:29 am to 9:57 am तथा 05 नवंबर 2026,पारण समय 6:39 am to 10:00 am
एकादशी - 22 अक्टूबर 2026, पारण समय 6:29 am to 9:57 am तथा 05 नवंबर 2026,पारण समय 6:39 am to 10:00 am
एकादशी - 22 अक्टूबर 2026, पारण समय 6:29 am to 9:57 am तथा 05 नवंबर 2026,पारण समय 6:39 am to 10:00 am
एकादशी - 22 अक्टूबर 2026, पारण समय 6:29 am to 9:57 am तथा 05 नवंबर 2026,पारण समय 6:39 am to 10:00 am
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🪔 श्री दामोदर मास विशेष

श्री दामोदराष्टकम्

26 अक्टूबर - 24 नवंबर 2026

श्री दामोदर मास

श्री दामोदराष्टकम् की व्याख्या को समझने, अपनी भक्ति वर्धन करने एवं ज्ञान को परखने के लिए प्रत्येक भाग का वीडियो देखें और उसके बाद Quiz अवश्य दें।

🪔 श्री दामोदराष्टकम्

श्री सत्यव्रत मुनि द्वारा की गई स्तुति (आठ श्लोकों में)

श्री दामोदराष्टकम् • भाग 1

🪔 श्री दामोदराष्टकम् (श्लोक 1 और 2)

📖 दामोदराष्टकम (पहला श्लोक)

नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरुपं, लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम् । यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं, परामृष्टमत्यंततो द्रुत्य गोप्या ॥1॥

📖 दामोदराष्टकम (दूसरा श्लोक)

रुदन्तं मुहुर्नेत्र युग्मं मृजन्तं , कराम्भोजयुग्मेन सातङ्कनेत्रम् । मुहुः श्वासकंप त्रिरेखांककण्ठ, स्थित ग्रैवदामोदरं भक्तिबद्धम् ॥2॥

📖 श्री दामोदराष्टकम्

  • प्रार्थना: श्री दामोदराष्टकम् श्री सत्यव्रत मुनि द्वारा की गई आठ श्लोकों की एक स्तुति है।
  • दामोदर नाम का अर्थ: ‘दाम’ (रस्सी) + ‘उदर’ (पेट)। माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण के उदर को रस्सी से ऊखल के साथ बाँधने के कारण भगवान श्रीकृष्ण का नाम दामोदर पड़ा।
  • लीला का स्वरूप: यह भगवान श्रीकृष्ण की वात्सल्य भाव की माधुर्यमयी लीला (दाम-बंधन लीला) है।

✨ लीला के तीन अवयव

  • भगवान श्रीकृष्ण
  • श्रीकृष्ण का धाम
  • श्रीकृष्ण के परिकर

🌺 प्रथम अवयव: भगवान श्रीकृष्ण

  • परमेश्वर: श्रीकृष्ण सर्व नियंता (सुप्रीम कंट्रोलर) हैं। वे परम स्वतंत्र हैं, सबके नियंता हैं, किंतु वे किसी के नियंत्रण में नहीं हैं।

🌌 द्वितीय अवयव: श्रीकृष्ण का धाम

धाम के तीन रूप:

अप्रकट प्रकाश • प्रकट प्रकाश • दृश्यमान जगत

    🌸 तृतीय अवयव: भगवान के परिकर

    भगवान के परिकर दो प्रकार के हैं:

    रागात्मिका परिकर • रागानुगा परिकर

      🪔 लीला किसे कहते हैं?

      • लीला: सांसारिक कर्म माया और काल के अधीन फल देने वाले होते हैं, जबकि भगवान के दिव्य कार्य मायातीत ‘लीला’ कहलाते हैं।
      • श्रीकृष्ण के स्वेच्छामय कार्य लीला कहलाते हैं।
      • माधुर्यमयी लीला: जहाँ ऐश्वर्य (भगवत्ता) छिप जाती है और प्रेम व संबंध की प्रगाढ़ता प्रमुख होती है। यह योगमाया के प्रभाव से संभव होता है।

      श्री दामोदराष्टकम् के श्लोक 1 और 2 में निहित दाम-बंधन लीला, भगवान, धाम और परिकरों के स्वरूप को समझने के लिए वीडियो पूरा देखें और उसके बाद Quiz अवश्य दें।

      श्री दामोदराष्टकम् • भाग 2

      🪔 श्री दामोदराष्टकम् (श्लोक 3)

      📖 दामोदराष्टकम (तीसरा श्लोक)

      इतीदृक् स्वलीलाभिरानन्दकुण्डे, स्वघोषं निमज्जन्तमाख्यापयन्तम् । तदीयेशितज्ञेषु भक्तैर्जितत्वं, पुन: प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे ॥3॥

      🌸 लीला और परिकरों का स्वरूप

      लीला के दो प्रकार:

      अप्रकट लीला • प्रकट (भौम) लीला
      • अप्रकट लीला: आध्यात्मिक जगत (श्रीगोलोक वृन्दावन) में नित्य चलने वाली लीला।
      • प्रकट (भौम) लीला: भौतिक जगत में अवतार के समय (पृथ्वी पर) प्रकट लीला।
      • ब्रजवासियों का स्वरूप: ब्रजवासी जीव-तत्त्व (तटस्था शक्ति) नहीं, बल्कि भगवान की स्वरूप-शक्ति के अंश हैं। वे नित्य सिद्ध प्रेमी भक्त हैं।
      • रागात्मिका भक्ति: भगवान के प्रति स्वाभाविक प्रेममय तृष्णा (लालसा) और अनुराग ही रागात्मिका भक्ति है। यह मुख्य ब्रजवासियों (नित्य परिकरों) की भक्ति है।
      • रागानुगा भक्ति: रागात्मिका परिकरों का अनुगमन करके की जाने वाली भक्ति।

      🙏 जीव का अधिकार: आनुगत्यमयी सेवा

      • तटस्था शक्ति की सीमा: जीव तटस्था शक्ति का अंश है, अतः वह स्वातंत्र्यमयी सेवा (सीधे पति, सखा, माता-पिता बनना) नहीं कर सकता।
      • आनुगत्यमयी सेवा: जीव का अधिकार केवल आनुगत्यमयी सेवा में है। वह सीधे श्रीकृष्ण या राधारानी की सखी/मंजरी नहीं बन सकता, बल्कि मंजरी की दासी बनकर ही सेवा का अधिकारी हो सकता है।

      🌺 रागानुगा साधन भक्ति एवं वैधी साधन भक्ति का अंतर

      भक्ति के दो मार्गों में अंतर:

      वैधी साधन भक्ति • रागानुगा साधन भक्ति
      • वैधी साधन भक्ति: शास्त्र-भय, नियमों और जन्म-मरण के चक्र से छूटने/मुक्ति की कामना से की जाने वाली भक्ति। इस साधन भक्ति का उद्देश्य वैकुण्ठ की चतुर्विधा मुक्ति प्राप्ति है।
      • रागानुगा साधन भक्ति: केवल सेवा-लालसा से ब्रजवासियों के भावों के अनुगत होकर की जाने वाली भक्ति। इसमें जन्म-मरण या शास्त्र का भय नहीं होता, किंतु शास्त्र के प्रमाणों का पूर्ण आदर रहता है। इस भक्ति का उद्देश्य गोलोक-वृन्दावन में राधा-कृष्ण की प्राप्ति है।

      श्री दामोदराष्टकम् के तीसरे श्लोक, लीला के प्रकार, रसिक की परिभाषा तथा रागानुगा और वैधी भक्ति के अंतर को समझने के लिए वीडियो पूरा देखें और उसके बाद Quiz अवश्य दें।