भाग 1
🌺 परमेश्वर का परिचय (भाग-1)
📖 ब्रह्म संहिता (5.1)
ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानंदविग्रहः। अनादिर आदि गोविंदः सर्वकारणकारणम्।।
📖 ब्रह्म संहिता: महिमा एवं पृष्ठभूमि
- ब्रह्मा जी द्वारा रचित शताध्यायी (100 अध्यायों वाला) दिव्य शास्त्र है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का निरूपण है।
- वर्तमान में इसका केवल पाँचवाँ अध्याय उपलब्ध है, जिसे भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने दक्षिण भारत के आदिकेशव मंदिर से प्राप्त किया था।
- श्री चैतन्य चरितामृत (मध्य लीला, परिच्छेद ९) के अनुसार, ब्रह्म संहिता समस्त वैष्णव शास्त्रों का सार है।
- पाँचवें अध्याय के 62 श्लोकों में से 29 श्लोक श्रीकृष्ण को परमेश्वर, सर्वकारणकारणम् तथा आदि पुरुष के रूप में स्थापित करते हैं।
🪔 1. सम्बंध तत्व एवं परमेश्वर
- ईश्वर अनेक हैं, महेश्वर कुछ कम हैं, परंतु परमेश्वर केवल एक ही हैं—भगवान श्रीकृष्ण।
- श्रीमद्भागवत में जिन्हें 'स्वयं भगवान' अथवा 'अद्वय ज्ञान तत्त्व' कहा गया है, ब्रह्म संहिता में उन्हें ही 'परमेश्वर' कहा गया है।
✨ 2. सच्चिदानंद विग्रह
श्रीकृष्ण का शरीर पंचभौतिक नहीं बल्कि दिव्य एवं सच्चिदानंदमय है।
तीन दिव्य शक्तियाँ:
- सत् (संधिनी शक्ति): शाश्वतता, अजरता, अमरता एवं सनातन स्वरूप।
- चित् (संवित् शक्ति): सर्वज्ञता, चेतनता एवं पूर्ण ज्ञान।
- आनंद (ह्लादिनी शक्ति): परम दिव्य सुख एवं परमानंद।
🌼 3. अनादिर आदि गोविंदः
- श्रीकृष्ण स्वयं अनादि (जन्मरहित) हैं।
- समस्त भौतिक एवं आध्यात्मिक जगत की सभी सत्ताओं (जीव, देवता तथा अन्य भगवद् स्वरूप) के आदि एवं मूल स्रोत हैं।
🌺 4. सर्वकारणकारणम्
- भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही जगत के समस्त कारणों के मूल कारण श्रीकृष्ण हैं।
- वे स्वयं अकारण हैं।
🌸 श्रीकृष्ण: स्वयं भगवान (पूर्ण ब्रह्म)
- वैकुण्ठनाथ श्री नारायण, श्रीकृष्ण के विलास रूप हैं।
- जगत्पालक श्री विष्णु, श्रीकृष्ण के स्वांश रूप हैं।
- श्रीमद्भागवत (1.3.28): 'एते चांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।'
- अर्थात् अन्य सभी अवतार अंश या कला अवतार हैं, परंतु श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं।
- ब्रह्मांड पुराण के अनुसार एक बार 'कृष्ण' नाम का जप विष्णु सहस्रनाम की तीन आवृतियों के समान फल प्रदान करता है।
🌺 श्री कृष्णाष्टमी विशेष संदेश
- श्रीमद्भगवद्गीता (10.8): 'अहं सर्वस्य प्रभवो...' अर्थात् मैं ही समस्त भौतिक एवं आध्यात्मिक जगत का मूल कारण हूँ।
- जो जीव श्रीकृष्ण की शरण ग्रहण करता है, वह त्रिगुणातीत होकर उनके परमधाम गोलोक में नित्य प्रेमाभक्ति प्राप्त करता है।
परमेश्वर श्रीकृष्ण के वास्तविक स्वरूप को शास्त्रों के प्रमाण सहित समझने के लिए वीडियो पूरा देखें और उसके बाद Quiz अवश्य दें।
